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अख़्मातवा / ओसिप मंदेलश्ताम

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आधा मुड़कर
हो रंजीदा
लापरवाही से उसने देखा

शाल अचानक गिरते-गिरते
ठहर गई उसके कंधों पर

आवाज़ थी उसकी बेहद उन्मादी
अमंगल सूचक
कड़वी थी वह भाँग की तरह<ref>आन्ना अख़्मातवा की एक कविता की पंक्ति-- ’पी रहा है वह मेरी रूह, जानती हूँ, कड़वी है वह भाँग की तरह</ref>

जैसे दफ़ना देगी रुहें सबकी
क्रोधित थी इतनी फ़ेदरा<ref>एक यूनानी मिथक के अनुसार क्रीत द्वीप के राजा मिनीसा की पुत्री और तेसेई की पत्नी फ़ेदरा अपने गोद लिए पुत्र से ही प्रेम करने लगी थी और जब उसका प्रेम ठुकरा दिया गया तो उसने आत्महत्या कर ली</ref>
खड़ी थी वह कुछ इस तरह
लिए राशेल<ref>फ़्राँसिसी अभिनेत्री एलिज़ा राशेल (1821-1858) ने कभी नाटककार रासिन (1639-1699) की त्रासद नाटिका ’फ़ेदरा’ (1677) में नायिका फ़ेदरा की भूमिका (1838 में) की थी।</ref> की मुद्रा

रचनाकाल : 1914

शब्दार्थ
<references/>