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अदाओं की तेरी जादूगरी जानी नहीं जाती / गुलाब खंडेलवाल

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अदाओं की तेरी जादूगरी जानी नहीं जाती

नहीं जाती है मेरे दिल की हैरानी नहीं जाती


ये किस मंज़िल पे ले आयी है तू ऐ ज़िन्दगी मुझको

कि अब सूरत भी मेरी मुझसे पहचानी नहीं जाती!


मुसाफिर लौटकर आने का फिर वादा तो करता जा

अगर कुछ और रुक जाने की जिद मानी नहीं जाती


ये माना तू ही परदे से इशारे मुझको करता है

बिना देखे मगर दिल की परीशानी नहीं जाती


अगर है प्यार दिल में तो कभी सूरत भी दिखला दे

तेरे कूचे की मुझसे खाक़ अब छानी नहीं जाती


कभी तड़पा ही देगी प्यार की खुशबू, गुलाब! उसको

कोई भी आह तेरे दिल की बेमानी नहीं जाती