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अब तुम / धनेश कोठारी

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अब तुम सिंग ह्वेग्यां

रंग्युं स्याळ् न बण्यांन्

सौं घैंटणौं सच छवां

कखि ख्याल न बण्यांन्

 

उचाणा का अग्याळ् छवां

ताड़ा का ज्युंदाळ् न बण्यांन्

थर्प्यां द्यब्ता छां हमखुणि

अयाळ् - बयाळ् न बण्यांन्

 

निसक्का कि ताणि छवां

तड़तड़ी उकाळ् न बण्यांन्

सैंन्वार जाणि हिटणान् सब्बि

च्वीलांण भ्याळ् न बण्यांन्

 

सना-सना बिंगौंणन् छ्विं

बन्दर फाळ् न मार्यान्

सांका परै कि खुद छवां

कुरघसिं काल न बण्यांन्

 

ज्युंदौं कि आस छवां

ज्युंरा कु ढाळ् न बण्यांन्

माथमि आशीष छवां

कखि गाळ् न बण्यान्