भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आँखें दिखाए / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

Kavita Kosh से
वीरबाला (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:04, 8 सितम्बर 2019 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

106
सब ले लेना
दो पल बदले में
चैन के देना।
107
अपना दु:ख
तुम दे देना सारा
ये मेरी थाती ।
108
जिन जन्मों का
मिला साथ तुम्हारा
हम न जाने ।
109
सिर उठाएँ ,
जब गर्म हवाएँ
झरें दुआएँ ।
110
फूलों की घाटी,
पग-तल की माटी-
बन मुस्काए ।
111
काया –छाया-सा
साथ रहेगा सदा
प्यारा हमारा ।
112
जो उलझनें
मिलीं बन चुनौती
सुलझें सभी
113
दर्द तुम्हारा
‘ये अधर पी जाएँ’-
सदा मनाएँ ।
114
खुशियाँ देना
हर धड़कन को
पूजा हमारी ।
115
तुम कौन हो ?
मैं हूँ कौन न जानूँ
एक हैं हम ।
116
खुशियाँ एक
एक ही तो हमारे
 सारे हैं गम ।
117
जंगल घिरा
घोर छाया अँधेरा
रौशनी बनो ।
118
आँखें दिखाए
घर-द्वारा आँगन
चलते चलो ।
119
बुझाते दिए
कुछ लोग आसुरी,
जलाते चलो ।
120
टूटें हो साज़
बिगड़ें काज सब,
तो गाते चलो ।