भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आग पानी के पास.. / ज्योत्स्ना शर्मा

Kavita Kosh से
वीरबाला (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 03:54, 6 जुलाई 2018 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


ये अदा भी तो ख़ास लगती है
आग पानी के पास लगती है ।
एक बस तू ही नहीं महफ़िल में
सारी दुनिया उदास लगती है ।
किस क़दर खार भर लिया दिल में
फिर ये कहता है प्यास लगती है ।
बेतकल्लुफ़ मिली ख़ुशी-ग़म से
ज़िंदगी ख़ुदशनास लगती है ।
झिलमिलाता है आस का तारा
सुबह भी आसपास लगती है ।