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"आज कुसुम कुम्हलाये / गुलाब खंडेलवाल" के अवतरणों में अंतर

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आज कुसुम कुम्हलाये  
 
आज कुसुम कुम्हलाये  
 
कल ही तो मैंने इनसे थे अपने केश सजाये  
 
कल ही तो मैंने इनसे थे अपने केश सजाये  
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मेरे फूल न तुम कुम्हलाना
 
मेरे फूल न तुम कुम्हलाना
 
प्रिय! पतझर में भी मुस्काना
 
प्रिय! पतझर में भी मुस्काना
 
खिलना, बस खिलते ही जाना, जग से आँख चुराये
 
खिलना, बस खिलते ही जाना, जग से आँख चुराये
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देख न सके तुम्हें मधुबाला
 
देख न सके तुम्हें मधुबाला
 
पी न सको अधरों की हाला  
 
पी न सको अधरों की हाला  
 
सौरभ बन पथ में उड़ जाना, कोई जान न पाये
 
सौरभ बन पथ में उड़ जाना, कोई जान न पाये
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पी चम्पक-कपोल-मधु जी भर  
 
पी चम्पक-कपोल-मधु जी भर  
 
झूम अलक में, पलक चूमकर
 
झूम अलक में, पलक चूमकर
 
बन जाना अधरों में मर्मर, जब प्रेयसी लजाये
 
बन जाना अधरों में मर्मर, जब प्रेयसी लजाये
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छू रज-कण प्रिय-पथ का प्यारा
 
छू रज-कण प्रिय-पथ का प्यारा
 
चरणों का बन जाय सहारा
 
चरणों का बन जाय सहारा
 
युग-युग तक संगीत तुम्हारा, मिलन रागिनी गाये  
 
युग-युग तक संगीत तुम्हारा, मिलन रागिनी गाये  
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आज कुसुम कुम्हलाये
 
आज कुसुम कुम्हलाये
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कल ही तो मैंने इनसे थे अपने केश सजाये
  
  
 
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02:15, 17 जुलाई 2011 के समय का अवतरण


आज कुसुम कुम्हलाये
कल ही तो मैंने इनसे थे अपने केश सजाये

मेरे फूल न तुम कुम्हलाना
प्रिय! पतझर में भी मुस्काना
खिलना, बस खिलते ही जाना, जग से आँख चुराये

देख न सके तुम्हें मधुबाला
पी न सको अधरों की हाला
सौरभ बन पथ में उड़ जाना, कोई जान न पाये

पी चम्पक-कपोल-मधु जी भर
झूम अलक में, पलक चूमकर
बन जाना अधरों में मर्मर, जब प्रेयसी लजाये

छू रज-कण प्रिय-पथ का प्यारा
चरणों का बन जाय सहारा
युग-युग तक संगीत तुम्हारा, मिलन रागिनी गाये

आज कुसुम कुम्हलाये
कल ही तो मैंने इनसे थे अपने केश सजाये