भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"आशिक़ी में है महवियत दरकार / आसी ग़ाज़ीपुरी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पंक्ति 6: पंक्ति 6:
 
<poem>
 
<poem>
 
आशिक़ी में है महवियत दरकार।
 
आशिक़ी में है महवियत दरकार।
 
 
राहते-वस्ल-ओ-रंजे-फ़ुरक़त क्या?
 
राहते-वस्ल-ओ-रंजे-फ़ुरक़त क्या?
 
  
 
न गिरे उस निगाह से कोई।
 
न गिरे उस निगाह से कोई।
 
 
और उफ़्ताद क्या, मुसीबत क्या?
 
और उफ़्ताद क्या, मुसीबत क्या?
 
  
 
जिनमें चर्चा न कुछ तुम्हारा हो।
 
जिनमें चर्चा न कुछ तुम्हारा हो।
 
 
ऐसे अहबाब, ऐसी सुहबत क्या?
 
ऐसे अहबाब, ऐसी सुहबत क्या?
 
  
 
जाते हो जाओ, हम भी रुख़सत हैं।
 
जाते हो जाओ, हम भी रुख़सत हैं।
 
 
हिज्र में ज़िन्दगी की मुद्दत क्या?
 
हिज्र में ज़िन्दगी की मुद्दत क्या?
 
</Poem>
 
</Poem>

17:48, 19 जुलाई 2009 का अवतरण

आशिक़ी में है महवियत दरकार।
राहते-वस्ल-ओ-रंजे-फ़ुरक़त क्या?

न गिरे उस निगाह से कोई।
और उफ़्ताद क्या, मुसीबत क्या?

जिनमें चर्चा न कुछ तुम्हारा हो।
ऐसे अहबाब, ऐसी सुहबत क्या?

जाते हो जाओ, हम भी रुख़सत हैं।
हिज्र में ज़िन्दगी की मुद्दत क्या?