भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"उसके बारे में / धूमिल" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: पता नहीं कितनी रिक्तता थी- जो भी मुझमे होकर गुजरा -रीत गया पता नही…)
 
पंक्ति 9: पंक्ति 9:
 
ऑक्सीजन का कर्ज़दार हूँ
 
ऑक्सीजन का कर्ज़दार हूँ
 
मैं अपनी व्यवस्थाओं में  
 
मैं अपनी व्यवस्थाओं में  
बीमार हूँ .
+
बीमार हू

23:28, 14 अप्रैल 2010 का अवतरण

पता नहीं कितनी रिक्तता थी- जो भी मुझमे होकर गुजरा -रीत गया पता नहीं कितना अन्धकार था मुझमे मैं सारी उम्र चमकने की कोशिश में बीत गया .

भलमनसाहत और मानसून के बिच खड़ा मैं ऑक्सीजन का कर्ज़दार हूँ मैं अपनी व्यवस्थाओं में बीमार हू