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"एक मासूम प्यार की आशा / रंजना भाटिया" के अवतरणों में अंतर

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<poem>काश मैं होती धरती पर बस उतनी
 
जिसके उपर सिर्फ़ आकाश बन तुम ही चल पाते
 
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या मैं होती किसी कपास के पौधे की डोडी
 
या मैं होती किसी कपास के पौधे की डोडी
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जिसकी दिशा ज्ञान से तुम अपनी मंजिल पा जाते
 
जिसकी दिशा ज्ञान से तुम अपनी मंजिल पा जाते
 
यूँ ही सज जाते मेरे सब सपने बन के हक़ीकत
 
यूँ ही सज जाते मेरे सब सपने बन के हक़ीकत
यदि मेरी ज़िंदगी के हमसफ़र कही तुम बन जाते !! इप करें</poem>
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यदि मेरी ज़िंदगी के हमसफ़र कही तुम बन जाते !! </poem>

14:25, 19 सितम्बर 2009 के समय का अवतरण

काश मैं होती धरती पर बस उतनी
जिसके उपर सिर्फ़ आकाश बन तुम ही चल पाते
या मैं होती किसी कपास के पौधे की डोडी
जिसके धागे का तुम कुर्ता बना अपने तन पर सजाते
या मैं होती दूर पर्वत पर बहती एक झरना
तुम राही बन वहाँ रुक के अपनी प्यास बुझाते
या मैं होती मस्त ब्यार का एक झोंका
जिसके चलते तुम अपने थके तन को सहलाते
या मैं होती दूर गगन में टिमटिम करता एक तारा
जिसकी दिशा ज्ञान से तुम अपनी मंजिल पा जाते
यूँ ही सज जाते मेरे सब सपने बन के हक़ीकत
यदि मेरी ज़िंदगी के हमसफ़र कही तुम बन जाते !!