भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

ऐसन छै / सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर'

Kavita Kosh से
Rahul Shivay (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:24, 16 सितम्बर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सुधीर कुमार 'प्रोग्रामर' |अनुवादक...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कभी हांस्सै कभी कानै किसानी चीज ऐसन छै।
विना बादल केरोॅ बरसा सुहानी चीज ऐसन छै।

उजाड़ै जे चिड़ैया के बसेरा जेठ-भादोॅ मेॅ
कुलंगारों केॅ की कहभोॅ जवानी चीज ऐसन छै।

उखाड़ै गाछ धरती केॅ उड़ाबै धूल परती केॅ
हवा के चाल दुनिया मेॅ तुफानी चीज ऐसन छै।
 
हवा कॅे लाज नय डर, अध-कपारी खूब मातै छै
मरद नाचै इषारा पर जनानी चीज ऐसन छै।

कभी बादल के जोड़ै छै कभी बादल के तोड़ै छै
मुसाफिर कंॅ सुनाबै गप-कहानी चीज ऐसन छै।