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"कवितावली/ तुलसीदास / पृष्ठ 15" के अवतरणों में अंतर

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'''किष्किन्धा काण्ड'''
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'''भाग-4 किष्किन्धा काण्ड प्रारंभ '''
  
 
'''(समुद्रोल्लंघन)'''
 
'''(समुद्रोल्लंघन)'''

20:09, 6 अप्रैल 2011 के समय का अवतरण

 
भाग-4 किष्किन्धा काण्ड प्रारंभ

(समुद्रोल्लंघन)

जब अंगदादिनकी मति-गति मंद भई ,


पवनके पूतको न कूदिबेको पलु गो।

 
साहसी ह्वै सैलपर सहसा सकेलि आइ,


 चितवत चहूँ ओर, औरति को कलु गो।


 ‘तुलसी’ रसातल को निकसि सलिलु आयो,


कालु कलमल्यो, अहि-कमठको बलु गो।ं


चारिहू चरन के चपेट चाँपें चिपिटि गो,

 
उचकें उचकि चारि अंगुल अचलु गो।।


(इति किष्किन्धा काण्ड )