भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"काम चले अमरीका का / हबीब जालिब" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार = हबीब जालिब }} {{KKCatGhazal‎}} <poem> नाम चले हरनामदास का काम …)
 
 
पंक्ति 20: पंक्ति 20:
 
बात तो जब है ऐ ‘जालिब’ एहसान तले अमरीका का
 
बात तो जब है ऐ ‘जालिब’ एहसान तले अमरीका का
 
</poem>
 
</poem>
{{KKMeaning}}
 

21:30, 14 मार्च 2011 के समय का अवतरण

नाम चले हरनामदास का काम चले अमरीका का
मूरख इस कोशिश में हैं सूरज न ढले अमरीका का

निर्धन की आँखों में आँसू आज भी है और कल भी थे
बिरला के घर दीवाली है तेल जले अमरीका का

दुनिया भर के मज़लूमों ने भेद ये सारा जान लिया
आज है डेरा ज़रदारों के साए तले अमरीका का

काम है उसका सौदेबाज़ी सारा ज़माना जाने है
इसीलिए तो मुझको प्यारे नाम खले अमरीका का

ग़ैर के बलबूते पर जीना मर्दों वाली बात नहीं
बात तो जब है ऐ ‘जालिब’ एहसान तले अमरीका का