भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

काळ बरस रौ बारामासौ (आसोज) / रेंवतदान चारण

Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:23, 8 मई 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रेंवतदान चारण |अनुवादक= |संग्रह=...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तपै आसोजी तावड़ौ बाजरियां बळ जाय
काचर रह्या अधपाकिया बेलड़ियां कुम्हळाय

तांता बळग्या तांतिया हुयौ घास रो होम
पड़ी छिंयाड़ी काळ री भुरट ढकीजी भोम

तूंबां री बेलां बधै उपजै नित अणमाप
कुण जांणै इण मिस कटै प्रिथमी हंदौ पाप

बात बडेरा केवता मन में धीरज राख
अेक मेह आसी भळै सौळै आंना साख

आद जुगां सूं आज तक तन री मिटी न आस
मांणस तौई मन में करै आसोजां री आस