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"कुछ मुक्तक / गोपाल सिंह नेपाली" के अवतरणों में अंतर

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(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गोपाल सिंह नेपाली }} {{KKCatKavita‎}} <poem> '''1. अफ़सोस नहीं इसक…)
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16:38, 20 जनवरी 2011 का अवतरण

1.
अफ़सोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सके,
झोलियाँ किसी की भर न सके, संताप किसी का हर न सके,
अपने प्रति सच्चा रहने का, जीवन भर हमने काम किया,
देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके ।

2.
कुछ देर यहाँ जी लगता है
कुछ देर तबियत जमती है
आँखों का पानी गरम समझ
यह दुनिया आँसू कहती है