भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कौन आज आ गया / उर्मिल सत्यभूषण

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:48, 20 अक्टूबर 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=उर्मिल सत्यभूषण |अनुवादक= |संग्रह...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यह कौन आके चेतना के
द्वार खटखटा गया
यह कौन आ पुकार कर
नींद से जगा गया
जो मर चुके अतीत को
गले लगा के रो रहे
जो मीत-प्रीत सुधियों
के बिछौने पर थे सो रहे
मोह भंग कर के साधना-
का पथ दिखा गया
किसने दी आवाज़ मदहोश।
उठ तू होश कर
तू रौशनी की ले मशाल
अंधेरे आज दूर तक
दृष्टि हो गई साफ-पर्दा-
आँख का हटा गया
यह कौन आज आ गया
मौत से नहीं अरे तू
जिं़दगी से प्यार कर
दलित दरिद्र जिं़दगी को
दिखा संवार कर
मर रही मनुष्यता का रूप
वो दिखा गया।