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क्या पता था उसका नश्तर एक बला हो जाएगा / कांतिमोहन 'सोज़'

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क्या पता था उसका नश्तर एक बला हो जाएगा ।
हमने सोचा था इलाजे-देरपा<ref>पक्का इलाज</ref> हो जाएगा ।।

दिल के हल्क़े में ख़िरद<ref>अक़्ल</ref> का दाख़िला अच्छा नहीं
रोकिए वरना यहाँ एक हादिसा हो जाएगा ।

तर्क करना<ref>तोड़ देना</ref> तो बहुत आसान है उससे दोस्ती
कल करोगे क्या जो वो फिर से फ़िदा हो जाएगा ।

जान दे देना मगर खोना न अपना बाँकपन
छेड़ना भूले तो वो तुमसे ख़फ़ा हो जाएगा ।

चूकना मत कोई मौक़ा वरना वो वादाशिकन<ref>वादा तोड़नेवाला</ref>
भूलकर तर्ज़े-जफ़ा<ref>सितम करनेवाली रीत</ref> ना-आश्ना<ref>अजनबी</ref> हो जाएगा ।

कल तो नासेह<ref>उपदेशक</ref> जाम लेकर मुझसे यूँ कहने लगा
उम्र-भर की तिश्नगी का इससे क्या हो जाएगा ।

दाद का हक़दार है कल सोज़ ने समझा दिया
'दोस्त तेरा हाथ तो दिल से जुदा हो जाएगा ।।

शब्दार्थ
<references/>