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"गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता / शिवदीन राम जोशी" के अवतरणों में अंतर

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वेद  पुराण गुरु  छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता ।
 
वेद  पुराण गुरु  छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता ।
गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।
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गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु, श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।
 
पृथ्वी जल और आकाश गुरु, चहूँ और गुरु ही गुरु दरसाता ।
 
पृथ्वी जल और आकाश गुरु, चहूँ और गुरु ही गुरु दरसाता ।
 
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।
 
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

23:30, 26 नवम्बर 2017 के समय का अवतरण

साँचा:KKDharmikRachana

वेद पुराण गुरु छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता ।
गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु, श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।
पृथ्वी जल और आकाश गुरु, चहूँ और गुरु ही गुरु दरसाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

धन्य गुरु बिन ज्ञान कहाँ, उर ध्यान कहाँ गुन को लखि पाता ।
गुरुदेव के चरण गहो मन रे, शरण रहो सन्मार्ग बताता ।
धन्य है धन्य वही जन धन्य है, जो गुरुदेव को नित्य रिझाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

राम गुरु श्रीकृष्ण गुरु, सर्वस्व गुरु धन हो पितु माता ।
श्रेष्ट गुरु सबसे तुम हीं, उर माहिं बसों सब तत्व के ज्ञाता ।
दरबार गुरु सब सार गुरु व बहार गुरु, गुरुदेव विधाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

स्वर्ग गुरु बैकुंठ गुरु ब्रिजधाम गुरु, चहुँ ओर लखता ।
गुरु हैं गुरु मेरा प्रेम गुरु, शुभ नेम गुरु उर माहिं सुहाता ।
अनुराग गुरु वैराग्य गुरु बड़ भाग्य गुरु, गुरु पाठ पढ़ता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

गुरु ब्रह्म हैं ब्रह्मा हैं विष्णु गुरु, शिव सत्य स्वरूप है सृष्टि रचाता ।
सुर संत फनिन्द्र मुनीन्द्र गुरु ,रवि चन्द्र वही कोउ पार न पाता ।
सर्वज्ञ अनन्त अखंड गुरु, गुरु ज्ञान की ज्योति हृदय में जगाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

शेष महेश गणेश दिनेश हटा भ्रम सत्य स्वरूप लाखता ।
भव पार लगावनहार गुरु, जय सत्य गुरु लखि भाग्य सराता ।
रंक से राव बने पल में, गुणगान यहि विधि से कोउ गाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

शत-शत बार प्रणाम करूँ, गुरु दीन जनों के हो भाग्य विधाता ।
पापिन के उद्धारक हो तुम, ज्ञान समुन्दर ज्ञान के दाता
हे गुरुदेव दयामय प्रेम दे, प्यार अनुपम आपसे पाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता ।

शेष महेश गणेश थके वह धन्य दिनेश थके थकि जाता ।
सारद बीन बजाय थके ऋषि नारद इन्द्र अमि बरसाता ।
बलिहारी गुरु गुन गाय़ रहे नर नाग कवि कोउ पार न पाता ।
शिवदीन निरंतर ध्यान लगा , गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता