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गुलाब खंडेलवाल

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* '''[[हर सुबह एक ताज़ा गुलाब / ग़ज़लें]]'''
*[[अब कहाँ मिलने की सूरत रह गयी! ]]*[[अब कोई प्यार की पहल तो करे ]]*[[अब उन हसीन अदाओं का रंग छूट गया ]]*[[आ, कि अब भोर की यह आख़िरी महफ़िल बैठे ]]*[[आप और घर पे हमारे, क्या खूब! ]]*[[आप क्यों दिल को बचाते हैं यों टकराने से! ]]*[[इन आँसुओं से तुम अपना दामन सजा रहे थे, पता नहीं था ]]*[[उसने करवा दी मुनादी शहर में इस बात की -- ]]*[[कभी दो क़दम, कभी दस क़दम, कभी सौ क़दम भी निकल सके ]]*[[कभी होठों पे दिल की बेबसी लाई नहीं जाती ]]*[[कहने को तो वे हमपे मेहरबान बहुत हैं ]]*[[कहाँ आ गए चलके हम धीरे-धीरे ]]*[[क्या छिपी है अब हमारे दिल की हालत आपसे! ]]*[[कुछ और चाँद के ढलते सँवर गयी है रात ]]*[[कुछ और भी है उन आँखों की बेज़ुबानी में ]]*[[ख़त्म उनपर हैं सभी शोखियाँ ज़माने की ]]*[[ख्वाब समझें कि वाक़या समझें ]]*[[चैन न आया दिल को घड़ी भर, हरदम वार पे वार हुए ]]*[[ज़माने भर की निगाहों से टालकर लाये ]]*[[ज़िन्दगी मरने से घबराती भी है ]]*[[ज़िन्दगी में यह सवाल उठाता है अक्सर, क्या करें! ]]*[[जीने का कोई हासिल न मिला आखिर यह उम्र तमाम हुई ]]*[[जो यहाँ पे आये थे सैर को, नहीं फिर वे लौटके घर गये ]]*[[जो सच कहें तो ये कुल सल्तनत हमारी है ]]*[[तुझसे लड़ जाय नज़र हमने ये कब चाहा था! ]]*[[तेरी बेरुखी ने मुझको ये हसीन ग़म दिया है ]]*[[दर्द को हँसकर उडाना चाहिए ]]*[[दिन गुज़रते गये, रात होती रही ]]*[[दिल को हमारे प्यार का धोखा तो नहीं है ]]*[[दिल हमें देखकर कुछ देर को धड़का होता ]]*[[दिए तो है रौशनी नहीं है, खड़े हैं बुत ज़िन्दगी नहीं है ]]*[[न छोड़ यों मुझे, ऐ मेरी ज़िन्दगी बेसाज़ ]]*[[प्यार का रंग हजारों से अलग होता है ]]*[[प्यार किस तरह उनको समझायें! ]]*[[प्यार दिल में है अगर प्यार से दो बात भी हो]]*[[पाँव तो उस गली में धरते हैं ]][*[[फूल अब शाख से झड़ता-सा नज़र आता है ]]*[[बात ऐसे तो बहुत होके रही अपनी जगह ]]*[[बेझिझक, बेसाज़, बेमौसम के आ ]]*[[भेंट उसने गुलाब की ले ली ]]*[[मुझे देखते रहे जो बड़ी बेरुखी से पहले ]]*[[मेरी चाह उस नज़र में है, कभी है, कभी नहीं है ]]*[[यह प्यार दगा दे, कभी ऐसा नहीं होगा ]]
*[[यों ख्यालों में उभरता है एक हसीन-सा नाम ]]
*[[यों तो निशान पाँव का मिलता है यहीं तक ]]
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