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चहकती चिड़िया / शम्भु बादल

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एक दिन
चहकती चिड़िया
आ गई मेरे पास
बड़ी ख़ूबसूरत थी चिडि़या

मैंने एक-एक अंग
बड़े गौर से देखा
सुन्दरता की ज्योति
कहाँ से आई ?
मैं समझ न सका

चिड़िया की कोमल चोंच में
तिनका था
चिड़िया ने बडे़ यत्न से
बड़े प्रेम से
एक घोंसला बनाया
हम दोनों साथ-साथ
घोंसले में रहने लगे
सुबह हुई-न-हुई
चिड़िया
उड़ गई
देखते-ही-देखते
आकाश में दूर
बादलों से आगे
चाँद-तारों के उस पार
गुम हो गई चिड़िया

रह गई चिड़िया की छवि
रह गया घोंसला
खाली, उदास

लोगों की नज़र
जब घोंसले पर पड़ती है
चिड़िया याद में चहकती है