भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

चाँदनी है दूध की धारा / रंजना वर्मा

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:24, 4 अप्रैल 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रंजना वर्मा |अनुवादक= |संग्रह=आस क...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चाँदनी है दूध की धारा।
या कोई एहसास है प्यारा॥

ढूँढ़ता है रोटियाँ नभ में
कोई बेबस भूख का मारा॥

अनबुझी है प्यास अधरों पर
पास है सागर मगर खारा॥

राह में कठिनाइयाँ कितनी
पर मनुज का पुत्र कब हारा॥

जिंदगी है रेत मुट्ठी की
प्राण पंछी देह की कारा॥