भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

चांद-चांदनी / केदारनाथ अग्रवाल

Kavita Kosh से
Pratishtha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:58, 28 फ़रवरी 2008 का अवतरण

यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


विश्व के

वट-वृक्ष के ऊँचे शिखर पर
चांद चढ़ कर,

चाव से नीचे निरख कर,

दूध की बाहें पसारे,

माधवी मधुरा धरा को भेंटता है,

और

यौवन-यामिनी की--
चांदनी का--

फूल फेनिल चूमता है ।