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जाय जगावहु कवन पितर लोग, भेलन पोता / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जाय जगावहु<ref>जगाओ</ref> कवन<ref>कौन</ref> पितर लोग, भेलन पोता।
पोता भेल बंस-बाढ़न,<ref>वंश-वृद्धिकारक</ref> बहु<ref>वधू</ref> जुड़वावस<ref>हृदय को शीतल करने वाला</ref>॥1॥
देइ घालऽ<ref>दे दो</ref> सोने के हँसुअवा, होरिला नार काटस<ref>काटे</ref>॥2॥
भोंरहिं राम जनम ले लें साँझहि लछुमन हो।
आधे राते भरथ भुआल, मोरे रे राम जनम ले ले हो॥3॥
दियवा<ref>दीपक</ref> खोजन गेलूँ,<ref>गई</ref> दियवो न मिलल, दियरवो<ref>दियट, दीपाधार</ref> न मिलल।
ललना, हिरवा<ref>हीरे, रत्न</ref> के करबो<ref>करूँगी</ref> अँजोर,<ref>प्रकाश</ref> मोरे राम जनमु ले लें॥4॥
हँसुआ खोजन गेलूँ, हँसुओ न मिलल।
सोने छुरिये राम नार काटब, मोरे राम जनम ले लें॥5॥

शब्दार्थ
<references/>