भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

तजरबे कीजिए मज़ीद नये / राज़िक़ अंसारी

Kavita Kosh से
द्विजेन्द्र द्विज (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 04:41, 18 दिसम्बर 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=राज़िक़ अंसारी }} {{KKCatGhazal}} <poem> तजरबे...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


तजरबे कीजिए मज़ीद नये
हो भी सकते हैं ग़म मुफ़ीद नये

आंसुओ को ग़िज़ा मुहैया कर
ज़ख्म दुनिया से कुछ ख़रीद नये

क़ैस की सफ़ में हमको शामिल कर
इश्क़ हम हैं तेरे मुरीद नये

एंड पिक्चर यहां पे थोड़ी है
और अभी आएंगे यज़ीद नये

कौन रिश्ते बहाल करता है
राज़ इफ़शा करेगी ईद नये

रात होने दो फिर बताएंगे
ज़ख्म किस दर्जा हैं शदीद नये