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तिरा बिछड़ना अजब सानिहा बनाया गया / नासिर परवेज़

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तिरा बिछड़ना अजब सानिहा बनाया गया
ज़रा सी बात थी पर वाक़िआ बनाया गया

रखा गया है कई साल पत्थरों के साथ
फिर उसके बाद मुझे आईना बनाया गया

वो लफ़्ज़ जिस को मिटाया था ख़त में लिख के कभी
उस एक लफ़्ज़ को ही मुद्दआ बनाया गया

ये दौर वो है के कम ज़र्फ़ को उरूज मिले
तो वो समझता है उसको ख़ुदा बनाया गया

जहाँ को उसने अता की हैं नेअमतें क्या क्या
हमारे वास्ते इक बेवफ़ा बनाया गया

लिखे थे उसने कई नाम पर ख़ुशा क़िस्मत
हमारे नाम पे इक दाइरा बनाया गया

समुन्दरों में तलातुम, भंवर में कश्ती थी
सो फिर ख़ुदा को मिरा नाख़ुदा बनाया गया

हमारे चेहरे की रंगत जो ज़र्द है नासिर
हमारे ख़ून से रंग-ए-हिना बनाया गया