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हुक्म तेरा है कि दम भर कहीं आराम न लूँ
यों न लहरा मेरी आँखों में सुनहला दे मेरे सामने आँचलअपना
मैं हूँ मदहोश, कहीं बढ़के इसे थाम न लूँ!
तू मेरे प्यार की धड़कन तो समझता है ज़रूर
मैं भले ही कभी होठों होँठों से तेरा नाम न लूँ
यह तो बतला कि खिलाये हैं भला क्यों ये गुलाब
है अगर जिद ये तेरी, इनसे कोई काम न लूँ !
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