भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर/ ज़ौक़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर
चुपके ही बैठे रहे दम को मसीहा<ref>ईसा</ref> लेकर

शर्ते-हिम्मत नहीं मुज़रिम हो गिरफ्तारे-अज़ाब<ref>कष्टों में फँसा</ref>
तूने क्या छोड़ा अगर छोड़ेगा बदला लेकर

मुझसा मुश्ताक़े-जमाल<ref>सौंदर्य प्रेमी</ref> एक न पाओगे कहीं
गर्चे ढूँढ़ोगे चिराग़े-रुखे-ज़ेबा<ref>ख़ूबसूरत रोशनी वाला दीप</ref> लेकर

तेरे क़दमों में ही रह जायेंगे, जायेंगे कहाँ
दश्त<ref>जंगल</ref> में मेरे क़दम आबलाए-पा लेकर

वाँ से याँ आये थे ऐ 'ज़ौक़' तो क्या लाये थे
याँ से तो जायेंगे हम लाख तमन्ना लेकर

शब्दार्थ
<references/>