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नींद आती नहीं है, ये क्या हो गया / ललित मोहन त्रिवेदी

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नींद आती नहीं है, ये क्या हो गया ?
रात जाती नहीं है, ये क्या हो गया ?

प्रेम हो या कि हो हादसा आँख अब !
छलछलाती नहीं है, ये क्या हो गया !!

अब किसी भी चरण पर कोई आस्था !
सर झुकाती नहीं है, ये क्या हो गया !!

वैसे कहने को तो रातरानी है ये !
गमगमाती नहीं है, ये क्या हो गया !!

हम ने पायल गढ़ाई ग़ज़ल बेच कर !
छनछनाती नहीं है, ये क्या हो गया !!

मीर की हो ग़ज़ल या कि दुष्यंत की !
गुदगुदाती नहीं है, ये क्या हो गया !!

खिलखिलाती नहीं ज़िन्दगी सब्र था !
मुस्कुराती नहीं है, ये क्या हो गया !!

अपनी तारीफ़ है और अपनी ज़ुबां  !
थरथराती नहीं है, ये क्या हो गया !!