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"नेपथ्य से संगीत / देवेश पथ सारिया" के अवतरणों में अंतर

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कान में बांसुरी की तरह
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शुक्र नेपथ्य में छूट गया था कहीं
बजती रही तुम्हारी पुकार
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रण कर्कश दुंदुभी के शोर के बीच
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मैं सिर पर शौर्य पताका ताने
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सूर्य-सा चमकता खड़ा था
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मृत्यु के अँधेरे कोलाहल में
  
शुक्र नेपथ्य में छूट गया था कहीं
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इस विभीषिका में
रण कर्कश दुंदुभी के शोर के बीच
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बांसुरी के संगीत की रौ में
मैं सिर पर शौर्य पताका ताने
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आँखें मूँद बह जाने का अर्थ होता
सूर्य-सा चमकता खड़ा था
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मृत्यु के अँधेरे कोलाहल में
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इस विभीषिका में  
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बांसुरी के संगीत की रौ में  
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आंखें  मूँद बह जाने का अर्थ होता
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तीर का गले को बींधते चले जाना
 
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बांस की धुन पर  
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कान में बांसुरी की तरह
थिरकती रही तलवार
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बजती रही तुम्हारी पुकार
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बांस की धुन पर
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थिरकती रही तलवार।
 
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21:09, 7 मार्च 2022 के समय का अवतरण

शुक्र नेपथ्य में छूट गया था कहीं
रण कर्कश दुंदुभी के शोर के बीच
मैं सिर पर शौर्य पताका ताने
सूर्य-सा चमकता खड़ा था
मृत्यु के अँधेरे कोलाहल में

इस विभीषिका में
बांसुरी के संगीत की रौ में
आँखें मूँद बह जाने का अर्थ होता
तीर का गले को बींधते चले जाना

कान में बांसुरी की तरह
बजती रही तुम्हारी पुकार

बांस की धुन पर
थिरकती रही तलवार।