भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"न दिमाग है कि किसू से हम / मीर तक़ी 'मीर'" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: न‍ि दिमाग है कि किसू से हम,करें गुफ्तगू गम-ए-यार में न फिराग है कि फ...)
 
 
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
 +
{{KKGlobal}}
 +
{{KKRachna
 +
|रचनाकार=मीर तक़ी 'मीर'
 +
}}
 +
[[Category:ग़ज़ल]]
 +
<poem>
 
न‍ि दिमाग है कि किसू से हम,करें गुफ्तगू गम-ए-यार में
 
न‍ि दिमाग है कि किसू से हम,करें गुफ्तगू गम-ए-यार में
 
न फिराग है कि फकीरों से,मिलें जा के दिल्‍ली दयार में
 
न फिराग है कि फकीरों से,मिलें जा के दिल्‍ली दयार में

23:20, 21 फ़रवरी 2009 के समय का अवतरण

न‍ि दिमाग है कि किसू से हम,करें गुफ्तगू गम-ए-यार में
न फिराग है कि फकीरों से,मिलें जा के दिल्‍ली दयार में

कहे कौन सैद-ए-रमीद: से,कि उधर भी फिरके नजर करे
कि निकाब उलटे सवार है, तिरे पीछे कोई गुबार में

कोई शोल: है कि शरार: है,कि हवा है यह कि सितार: है
यही दिल जो लेके गड़ेंगे हम,तो लगेगी आग मजार में