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"पानी रोता नहीं / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

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रस बन बह गया
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सब कुछ सह गया
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हृदय में तुम्हारे
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बना प्यार निर्मल
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और वहीं रह गया।
  
 
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07:35, 7 मई 2019 के समय का अवतरण

मेरे परम आत्मीय
बहकर अनवरत भी
पानी रोता नहीं
तुम्हारी आँखों में छलका
बहुत कुछ कह गया
अधरों पर उतरा
रस बन बह गया
बन गया लाज
सब कुछ सह गया
बना जो उमंग तो
माना नहीं वह
हृदय में तुम्हारे
बना प्यार निर्मल
और वहीं रह गया।