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"पुरानी कमीज़ / प्रयाग शुक्ल" के अवतरणों में अंतर

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आया याद कुछ बरस
 
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पहले का चेहरा
 
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भरोसा, प्रेम
 
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देखकर अपनी पुरानी कमीज़ को ।
 
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रंग ठीक वही नहीं,
 
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पर दिलाता याद
 
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भरे-पूरे रंग की !
 
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कितने दिन कौंध गए--
 
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बंद पड़ी संदूक से
 
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निकली
 
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कमीज़ में !
 
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18:07, 1 जनवरी 2009 के समय का अवतरण

आया याद कुछ बरस
पहले का चेहरा
भरोसा, प्रेम
देखकर अपनी पुरानी कमीज़ को ।
रंग ठीक वही नहीं,
पर दिलाता याद
भरे-पूरे रंग की !

कितने दिन कौंध गए--
बंद पड़ी संदूक से
निकली
कमीज़ में !