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और देखो सड़क के भीतर फ़ैला आकाश
कितना मुलायम हो गया है
जिसमेंतारे जिसमें तारे खोज रहे हैं अपनी मासूमियत
अन्तरिक्ष तक उठने से पहले आकाशगंगा की लहर
सिहर रही है चेतना की परिधि पर