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"प्लेटफार्म के भिखमंगे / मनोज श्रीवास्तव" के अवतरणों में अंतर

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ये हट्टे-कटते भिखमंगे
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चलते अकड़कर, डंडे पकड़कर
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हाथ झुलाते हुए बण्डल जकड़कर
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ठिठुरकर, सिकुड़कर
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पैर पटककर
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धुँआए ओठों पर जीभ लिसोढ़कर,
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गुठलियाँ चिचोराते
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पालीथीन पलटकर
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माल चिसोरते,
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छीजनों पर झपटकर
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खबरहे कुत्तों संग
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ओठ-मुंह निपोरते
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ये खूंसट, खबीस
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और खींझते भिखमंगे
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रेंगते पटरियों पर नंगे-अधनंगे
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समेटते बिखरे हुए जिस्मानी हिज्जे
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अपनी टांग गठरी में
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भूले से रख देते,
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कुत्ते नहाते देख
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फिस्स-फिस्स हंस देते,
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फिर, अपनी केहुनियों पर
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बचपन से जमी कई
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निकोरते बहलते
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ये मनमौजी, मुस्टंडे
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मस्त-मस्त भिखमंगे,
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मिल जाता खा लेते
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ना मिलता सो लेते,
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सोते-सोते गठरी में
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अपने हाथ डालकर
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हफ्ते-भर

16:47, 31 मार्च 2011 का अवतरण


प्लेटफार्म के भिखमंगे


ये हट्टे-कटते भिखमंगे
चलते अकड़कर, डंडे पकड़कर
हाथ झुलाते हुए बण्डल जकड़कर
ठिठुरकर, सिकुड़कर
पैर पटककर
धुँआए ओठों पर जीभ लिसोढ़कर,
गुठलियाँ चिचोराते
पालीथीन पलटकर
माल चिसोरते,
छीजनों पर झपटकर
खबरहे कुत्तों संग
ओठ-मुंह निपोरते

ये खूंसट, खबीस
और खींझते भिखमंगे
रेंगते पटरियों पर नंगे-अधनंगे
समेटते बिखरे हुए जिस्मानी हिज्जे
अपनी टांग गठरी में
भूले से रख देते,
कुत्ते नहाते देख
फिस्स-फिस्स हंस देते,
फिर, अपनी केहुनियों पर
बचपन से जमी कई
निकोरते बहलते

ये मनमौजी, मुस्टंडे
मस्त-मस्त भिखमंगे,
मिल जाता खा लेते
ना मिलता सो लेते,
सोते-सोते गठरी में
अपने हाथ डालकर
हफ्ते-भर