भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"बाघ आया उस रात / नागार्जुन" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पंक्ति 10: पंक्ति 10:
 
बतला रहा था-
 
बतला रहा था-
 
"हाँ बाबा, बाघ आया उस रात,
 
"हाँ बाबा, बाघ आया उस रात,
आप रात को बाहर न निकलों!
+
आप रात को बाहर न निकलो!
 
जाने कब बाघ फिर से बाहर निकल जाए!"
 
जाने कब बाघ फिर से बाहर निकल जाए!"
 
"हाँ वो ही, वो ही जो
 
"हाँ वो ही, वो ही जो

14:21, 30 दिसम्बर 2020 का अवतरण

"वो इधर से निकला
उधर चला गया"
वो आँखें फैलाकर
बतला रहा था-
"हाँ बाबा, बाघ आया उस रात,
आप रात को बाहर न निकलो!
जाने कब बाघ फिर से बाहर निकल जाए!"
"हाँ वो ही, वो ही जो
उस झरने के पास रहता है
वहाँ अपन दिन के वक़्त
गए थे न एक रोज़?
बाघ उधर ही तो रहता है
बाबा, उसके दो बच्चे हैं
बाघिन सारा दिन पहरा देती है
बाघ या तो सोता है
या बच्चों से खेलता है ..."

दूसरा बालक बोला-
"बाघ कहीं काम नहीं करता
न किसी दफ़्तर में
न कॉलेज में"
छोटू बोला-
"स्कूल में भी नही ..."

पाँच-साला बेटू ने
हमें फिर से आगाह किया
"अब रात को बाहर होकर बाथरुम न जाना"