भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"बिना विचारे जो करै / गिरिधर" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गिरिधर }} Category:कुण्डलियाँ <poeM>बिना विचारे जो करै, ...)
 
छो
 
पंक्ति 4: पंक्ति 4:
 
}}
 
}}
 
[[Category:कुण्डलियाँ]]
 
[[Category:कुण्डलियाँ]]
<poeM>बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
+
<poeM>
 +
बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
 
काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय॥
 
काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय॥
  

20:26, 15 जनवरी 2011 के समय का अवतरण

बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय॥

जग में होत हंसाय, चित्त चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान, राग रंग मनहिं न भावै॥

कह 'गिरिधर कविराय, दु:ख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय मांहि, कियो जो बिना बिचारे॥