भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

माहो-माही / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 13:49, 22 अगस्त 2009 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

माह[1]
माही[2] से खफा है
उछाल कर उस ने
कर दिया
मुंतशिर[3] मंज़र
मौज[4] माही के तआकुब[5] में
गई है साहिलों[6] तक

शब्दार्थ
  1. चांद
  2. मछली
  3. बिखरना
  4. लहर
  5. पीछा करना
  6. किनारों