भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

मोबाइल / घनश्याम नाथ कच्छावा

Kavita Kosh से
Neeraj Daiya (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 06:49, 14 मई 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=घनश्याम नाथ कच्छावा |संग्रह=मंडा...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जीवण
जियां-
मोबाइल रो सैट
अर
‘सिम’ इणरी आतमा
सांसां सूं रिचार्ज
हुवै आ काया।
 
मोबाइल सैट-सी
बणी
इण मिनखाजूण सूं
मिनखपणै री ‘रिंगटोन’
गायब हुयगी
अबै
जीवण रो मोबाइल
खाली सांसां रो
खोळियो हुय’र
बिना चेतना रै पाण
‘वायबरेशन’ रै माथै इज
पड़्यो है।