भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

म्हैं नी दीन्यो उपहार में सबद-कोस / मालचंद तिवाड़ी

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ३ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:14, 30 अप्रैल 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=मालचंद तिवाड़ी |संग्रह= }} {{KKCatKavita}} {{KKCa...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हुय सकै चिना’क
पुहुप री पांखड़ियां जितरा
कै अणथाग
किणी म्हैल में चिचिया भाटां जितरा-
सबद थारै अर म्हरै बिचाळै।

नीं बणै पुहुप
नीं म्हैल
अेड़ा अरथ-बिहूण सबदां रौ आपां कांई करां ?

इणी सांतर
म्हैं नीं दीन्यो उपहार में सबद-कोस थनै।
इणाी सांतर
म्हैं बावड़ जाऊं घणी दफै
अबोलो थारै आंगणै सूं।