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यमों के माथे अक्षत-चंदन / नीलिमा सिन्हा

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नियम
क्या उसी चिड़िया का नाम है
जो जायज-नाजायज मुजालतों पर अपने पंख पसारती है
और उन अण्डों से निकलने वाले बच्चों को
उड़ान सिखलाती है?

नियम
क्या उसी चिड़िया का नाम है
जो चोंच में सांप दाब आसमान में उड़ती है
और रेलवे क्रासिंग पार रुके
एक अदना से सायकिल सवार के माथे पर
ऐन वक्त पर छोड़ देती है वह
जिंदा सांप?

नियम
क्या उसी चिड़िया का नाम है
जिसके पंखों पर सवार उतरता है एक मायावी देव
छद्म वेश में
अपने पांव किसी प्रजा-पालक अहंकारी बली के
सर पर धंसाते हुए उसे रसातल में?
पुरोहित करते हैं मंत्रोच्चार
कभी देव कभी चिड़ियांे की प्रशंसा में
जिन स्तुतियों के श्रवण लाभ के अधिकारी
होते हैं वे अभिजात पुरुष
जिनके पत्र-पुष्प स्वीकार्य होते हैं महामहिम देव को!
ऋचाओं की तरह
संरक्षित अबूझ
जिन रहस्य-वाक्यों के बारे में
करता है कोई मन
साधिकार उद्घोष
कि इनका श्रवण-पठन-लाभ
शूद्रों और स्त्रियों के लिए सर्वथा वर्जित है?

नियम
क्या उसी चिड़िया का नाम है
जिन पर टिका होता है किसी धर्मगुरु का वजूद
जिसे रटाता है वह
”जनहित“ के समानार्थक कुछ कलाम
और जादू के जोर से
हो जाती है रातों-रात
वह चिड़िया एक पाक-साफ किताब
जिसमें हक-ओ-हादीस के नाम होते हैं चंद सफे
जिन्हें मानने न मानने के कई-कई बहाने
मौजूद होते हैं उन्हीं सफों में?
तो ऐ नियम
तेरे माथे पर अक्षत-चंदन
आ मैं तुझे ताक पर रख दूं
तेरी पूजा करुं
तेरे सामने सर-ब-सिजदा होऊं
ताकि आसानी से कलम किया जा सके
मेरा सर!

(साभार: युद्धरत आम आदमी अंक-37, जनवरी-मार्च, 1997)