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"यादों के फूल / शाहिद अख़्तर" के अवतरणों में अंतर

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...और बरसों बाद  
 
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जब मैंने वह किताब खोली  
 
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वहां अब भी बचे थे  
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उस फूल के कूछ जर्द पड़े हिस्से  
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जो तुमने कालेज से लौटते हुए
 
जो तुमने कालेज से लौटते हुए
 
मुझे दिया था
 
मुझे दिया था
  
हां, बरसों बीत गए
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हाँ, बरसों बीत गए
लेकिन मेरे लिए तो अब भी वहीं थमा है  वक्‍त
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लेकिन मेरे लिए तो अब भी वहीं थमा है  वक़्त
अब भी बाकी है  
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अब भी बाक़ी है  
 
तुम्हारी यादों की तरह  
 
तुम्हारी यादों की तरह  
इस फूल की खुशबू
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इस फूल की ख़ुशबू
  
अब भी ताजा है  
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अब भी ताज़ा है  
इन जर्द पंखुडि़यों पर  
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इन ज़र्द पंखुडि़यों पर  
 
तुम्हारे मरमरीं हाथों का  
 
तुम्हारे मरमरीं हाथों का  
 
वह हसीं लम्‍स
 
वह हसीं लम्‍स
उससे झांकता है तुम्‍हारा अक्‍स
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उससे झाँकता है तुम्‍हारा अक्‍स
  
वक्त के चेहरे पे  
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वक़्त के चेहरे पे  
 
गहराती झुर्रियों के बीच
 
गहराती झुर्रियों के बीच
मैं चुनता रहता हूं
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मैं चुनता रहता हूँ
 
तुम्‍हारा लम्‍स तुम्‍हारा अक्‍स
 
तुम्‍हारा लम्‍स तुम्‍हारा अक्‍स
तुम्हारी यादों के फुल
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तुम्हारी यादों के फूल
  
कभी आओ तो दिखाएं
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कभी आओ तो दिखाएँ
 
दिल के हर गोशे में  
 
दिल के हर गोशे में  
 
मौजूद हो तुम  
 
मौजूद हो तुम  
हर तरफ गूंजती है बस तुम्‍हारी यादों की सदा
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हर तरफ गूँजती है बस तुम्‍हारी यादों की सदा
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बरसों बाद जब मैंने ...
 
बरसों बाद जब मैंने ...
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02:46, 26 अगस्त 2010 के समय का अवतरण

...और बरसों बाद
जब मैंने वह किताब खोली
वहाँ अब भी बचे थे
उस फूल के कूछ ज़र्द पड़े हिस्से
जो तुमने कालेज से लौटते हुए
मुझे दिया था

हाँ, बरसों बीत गए
लेकिन मेरे लिए तो अब भी वहीं थमा है वक़्त
अब भी बाक़ी है
तुम्हारी यादों की तरह
इस फूल की ख़ुशबू

अब भी ताज़ा है
इन ज़र्द पंखुडि़यों पर
तुम्हारे मरमरीं हाथों का
वह हसीं लम्‍स
उससे झाँकता है तुम्‍हारा अक्‍स

वक़्त के चेहरे पे
गहराती झुर्रियों के बीच
मैं चुनता रहता हूँ
तुम्‍हारा लम्‍स तुम्‍हारा अक्‍स
तुम्हारी यादों के फूल

कभी आओ तो दिखाएँ
दिल के हर गोशे में
मौजूद हो तुम
हर तरफ गूँजती है बस तुम्‍हारी यादों की सदा

बरसों बाद जब मैंने ...