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"युग के वन्दन / सूर्यदेव पाठक 'पराग'" के अवतरणों में अंतर

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13:35, 30 मार्च 2015 के समय का अवतरण

युग के वन्दन
नत अभिनन्दन

साँप उहें बा
जहवाँ चन्दन

लोग बढ़त बा
पग-पग क्रन्दन

इज्जत गिरवी
हावी बा धन

कठिन साधना
चंचल जब मन

राम जुबाँ पर
भीतर रावन

कलई लागल
लउके कंचन