भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"लोकतन्त्र / लैंग्स्टन ह्यूज़" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKAnooditRachna |रचनाकार=लैंग्स्टन ह्यूज़ |संग्रह=आँखें दुनिया की तर…)
 
 
पंक्ति 29: पंक्ति 29:
  
 
'''मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : राम कृष्ण पाण्डेय'''
 
'''मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : राम कृष्ण पाण्डेय'''
 +
………………………………………………………………………
 +
'''[[लोकतन्त्र / ल्याङ्ग्स्टन ह्यूज / सुमन पोखरेल|यहाँ क्लिक गरेर यस कविताको नेपाली अनुवाद पढ्न सकिन्छ]]'''
 
</poem>
 
</poem>

09:31, 4 दिसम्बर 2020 के समय का अवतरण

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: लैंग्स्टन ह्यूज़  » संग्रह: आँखें दुनिया की तरफ़ देखती हैं
»  लोकतन्त्र

आपका लोकतन्त्र नहीं आएगा अभी
या इस वर्ष, या कभी भी
समझौते या भय से

मुझे भी अधिकार है उतना ही
जितना कि किसी दूसरे को है
अपने पैरों पर खड़े होने का
और ज़मीन का मालिक बनने का

मैं थक गया हूँ
लोगों से यह सुनते-सुनते
कि समय पर सब हो जाएगा
कल का दिन एक और दिन हो जाएगा
मुझे मरने के बाद आज़ादी नहीं चाहिए
कल की रोटी पर मैं जी नहीं सकता

बड़ा पुष्ट होता है आज़ादी का बीज़
ज़रूरत के वक़्त बोया गया हो तब
मैं भी यहीं रहता हूँ
मुझे भी आज़ादी चाहिए तुम्हारी तरह


मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : राम कृष्ण पाण्डेय
………………………………………………………………………
यहाँ क्लिक गरेर यस कविताको नेपाली अनुवाद पढ्न सकिन्छ