भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"वन्स मोर / प्रभुदयाल श्रीवास्तव" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=प्रभुदयाल श्रीवास्तव |अनुवादक= |स...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
(कोई अंतर नहीं)

19:20, 2 अगस्त 2020 के समय का अवतरण

कूद-कूद मेंढक भैया ने,
कविता एक सुनाई।
टर्र-टर्र बस टर्र-टर्र की,
ही ध्वनि पड़ी सुनाई।
गुस्से के मारे दर्शक सब,
जोरों से चिल्लाये।
मेंढक भैया गए मंच से,
ताबड़ तोड़ भगाए।
तभी बहन कोयल ने आकर,
हँसकर मंच संभाला।
शक्कर जैसे पगे कंठ से,
मीठा गीत निकाला।
उसके मीठे शहद सरीखे,
बोल सभी को भाये।
सारे दर्शक ज़ोर-जोर से,
वन्स मोर चिल्लाये।