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"वह सुबह / येव्गेनी येव्तुशेंको" के अवतरणों में अंतर

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ऊषा
 
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अभी मेपल वृक्ष के
 
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हाथों में थी
 
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सो रही थी यूँ जैसे कोई
 
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नन्हा शिशु हो
 
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और चन्द्रमा झलक रहा था
 
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इतना नाज़ुक
 
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मेघों के बीच गुम हो जाने का
 
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इच्छुक वो
 
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गर्मी की
 
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उस सुबह को पक्षी
 
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घंटी जैसे घनघना रहे थे
 
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नए उमगे पत्तों पर धूप
 
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और बेड़े पर पड़े हुए थे
 
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शुभ्र, सुनहरे कुंदन-से
 
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वे चमचमा रहे थे
 
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01:37, 17 फ़रवरी 2009 के समय का अवतरण


ऊषा
अभी मेपल वृक्ष के
हाथों में थी
सो रही थी यूँ जैसे कोई
नन्हा शिशु हो
और चन्द्रमा झलक रहा था
इतना नाज़ुक
मेघों के बीच गुम हो जाने का
इच्छुक वो

गर्मी की
उस सुबह को पक्षी
घंटी जैसे घनघना रहे थे
नए उमगे पत्तों पर धूप
बिछल रही थी
और बेड़े पर पड़े हुए थे
मछली के ढेर
शुभ्र, सुनहरे कुंदन-से
वे चमचमा रहे थे