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पावन प्रेम राम-चरन-कमल जनम लाहु परम।
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रामनाम लेत होत, सुलभ सकल धरम।
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जोग, मख, बिबेक, बिरत , बेद-बिदित करम।
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करिबै कहँ कटु कठोर, सुनत मधुर, नरम।
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तुलसी सुनि, जानि-बूझि, भूलहि जानि भरम।
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तेहि प्रभुको होहि, जाहि सब ही की सरम।।
 
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12:38, 11 मार्च 2011 का अवतरण

पद 131 से 140 तक

(131)

पावन प्रेम राम-चरन-कमल जनम लाहु परम।

रामनाम लेत होत, सुलभ सकल धरम।

जोग, मख, बिबेक, बिरत , बेद-बिदित करम।

करिबै कहँ कटु कठोर, सुनत मधुर, नरम।

तुलसी सुनि, जानि-बूझि, भूलहि जानि भरम।

तेहि प्रभुको होहि, जाहि सब ही की सरम।।