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शरद में या वसन्त में / गुन्नार एकिलोफ़

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शरद में या वसन्त में
क्या फ़र्क़ पड़ता है?
जवानी में या बुढ़ापे में
इसके क्या मानी?
कुछ भी हो
तुम्हें होना है विलुप्त
विराट की छाया में

तुम लुप्त हुए,
लुप्त तुम
अभी या निमिष पूर्व,
या कि हज़ार साल पहले
लेकिन तुम्हारा लुप्त होना ही

रहता है शेष।