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सब्रे-वहशत असर न हो जाए / मोमिन

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सब्रे-वहशत असर न हो जाए
कहीं सहरा भी घर न हो जाए

हिज्रे-परदानशीं1 में मरते हैं
ज़िन्दगी परदा-दर2 न हो जाए

कसरते-सिजदा3 से वह नक़्शे-क़दम4
कहीं पामाल-सर5 न हो जाए

मेरे तग़य्युरे-रंग6 को मत देख
तुझको अपनी नज़र न हो जाए

मेरे आँसू न पोंछना देखो
कहीं दामान-तर7 न हो जाए

बात नासेह से करते डरता हूँ
कि फ़ुग़ाँ8 बे-असर न हो जाए

ऐ क़यामत न आइयो जब तक
वह मेरी गोर न हो जाए

मनअ-ए-ज़ुल्म9 है तग़ाफ़ुले-यार10
बख़्त-बद11 को ख़बर न हो जाए

ग़ैर से बेहिजाब मिलते हो
शबे-आशिक़11 सहर12 न हो जाए

ऐ दिल, आहिस्ता आह-ताबे-शिकन13
देख टुकड़े जिगर न हो जाए

शब्दार्थ:

1. पर्दा करने वाली जुदाई 2. पर्दा फाड़ने वाली 3. सिर को ज़्यादा झुकाना 4. पैरों के चिह्न 5. सिर के द्वारा तबाही 6. रंग बदलना 7. अपराधी होना 8. रोना 9.ज़ुल्म का अवरोध 10. प्रेयसी की लापरवाही 11. दुर्भाग्य 12. प्रेमी की रात 13. बल को भेदने वाली आह!