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सुनो, इज़राइल / एरिष फ़्रीड / प्रतिभा उपाध्याय

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जब हमारा दमन किया जा रहा था
मैं तुममें से एक था तब
लेकिन
अब हम एक कैसे रह सकते हैं
जब तुम दमनकारी हो गए हो?

तुम्हारी इच्छा थी
दूसरे राष्ट्रों की तरह बनने की
लेकिन
अब तुम उनके जैसे ही हो गए हो
जिन्होंने तुम्हारी हत्या कीI

तुम बन गए हो
उनसे भी अधिक निर्दयी,

तुमने लोगों को हुक़्म दिया है —
अपने जूते उतारो
बलि के बकरे की तरह खदेड़ दिया है तुमने
उन्हें जंगलों में

मृत्यु की बड़ी मस्जिद में
जिसका चन्दन रेत है
लेकिन उन्होंने पाप को स्वीकारा नहीं
तुम चाहते हो उन पर आरोप लगाना

उनके नंगे पैरों के निशान
रेगिस्तान की रेत में
मिटा देते हैं निशान
तुम्हारे बमों और तोपों के।

मूल जर्मन से अनुवाद : प्रतिभा उपाध्याय