भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"सूनापन चहका-चहका / यश मालवीय" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(New page: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=यश मालवीय |संग्रह=एक चिड़िया अलगनी पर एक मन में / यश माल...)
 
पंक्ति 10: पंक्ति 10:
 
पहली बरखा सावन की<br><br>
 
पहली बरखा सावन की<br><br>
  
बरस-बरस बरसे हैं घन<br>
+
बरस-बरस हैं घन बरसे <br>
 
अब की भी घुमड़े बरसे<br>
 
अब की भी घुमड़े बरसे<br>
 
लेकिन पिछली ऋतु जैसे<br>
 
लेकिन पिछली ऋतु जैसे<br>

15:40, 1 जून 2010 का अवतरण

अभिवादन बादल-बादल
ख़बर लिये वन-उपवन की
कितने आशीर्वाद लिये
पहली बरखा सावन की

बरस-बरस हैं घन बरसे
अब की भी घुमड़े बरसे
लेकिन पिछली ऋतु जैसे
मन के हिरन नहीं तरसे
सूनापन चहका-चहका
चिड़िया चहकी आँगन की

रूनक-झुनक-झुन पायल की
बूँदों की रुनझुन-रूनझुन
सगुन हो रहे क्षण-क्षण पर
स्वस्तिक सजा, मिटा असगुन
घड़ी-घड़ी पर छवि निरखूँ
अपने जिया-जुड़ावन की

उमड़ रही जामुनी घटा
सजता आँखों का काजल
हरी-हरी पगडंडी पर
मौसम है श्यामल-श्यामल
रूप इंद्रधनु खिला-खिला
हुई समस्या दरपन की