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हमें क्या है / सुदर्शन वशिष्ठ

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हमें क्या पड़ी है जी
आप कुएं में कूदो
           या नदी में
हमें क्या है!

हवाला हो
तहलका हो
छिन रहा निवाला हो
हमें क्या है!

सूखा पड़े
बादल फटे
बाढ़ आए
भूकंप आए
कोई बंदा
आड़ में खाए
हमें क्या!

हड़तालें हों
खड़तालें हों
नारे लगें
न्यारे-व्यारे लगें
बसें टूटें
गाड़ियां जलें
यूनियनें फलें
हमें क्या!


मंदिर बने
बने मस्जिद
या गिरजाघर
कांग्रेस हो या भाजपा
लोजपा हो या माकपा
साईं हो या करमप्पा
हमें क्या।

कोई लूटता है
लूटता रहे
देश गर असबाब है
बिकता है
बिकता रहे
हमें क्या पड़ी है
हमें क्या पड़ी है
हमनें क्यूं कहणा।

रूस के हों टुकड़े
जर्मनी टूटे या जुड़े
अमेरिका पर गिरे
अमेरिका का ही जहाज़
हमें क्या बतलाते हो जी
हमने क्या लैणा।

लादेन बिन
बिना बुश
नहीं चलता भई संसार
सात समंदर हुए पार
अब तो आ गया
फॉरेन का माल
घटिया हुआ देसी बाजार
सांसदों ने बढ़ा लिये भत्ते
कर्मचारियों की हुई छंटनी
अर्थव्यवस्था खस्ता हाल
गरीब और जोरू बेहाल
ईमानदारों की हो रही तलाश
रोज आ रही सैनिक की लाश
..................................
ओ हमें क्या लैणा है जी
होता रहे जो होणा है।